शिक्षा केवल अंग्रेज़ी भाषा में नहीं होनी चाहिए। हमें अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए, क्योंकि यही हमारी संस्कृति और परंपरा को बनाए रख सकती है। हमें ऐसी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है जो हमें हमारे समाज की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने के योग्य बनाए।इसके साथ ही, शिक्षा केवल बुद्धि का विकास नहीं करती, बल्कि हृदय और आत्मा का भी विकास करती है। एक शिक्षित व्यक्ति वही है जो अपने ज्ञान का उपयोग समाज की सेवा के लिए करे। यदि कोई व्यक्ति बहुत पढ़ा-लिखा है, लेकिन उसमें करुणा और सेवा की भावना नहीं है, तो उसकी शिक्षा व्यर्थ है।इसलिए हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था को अपनाना होगा जो हमें आत्मनिर्भर बनाए, हमें सत्य और अहिंसा का पालन करना सिखाए और हमें अपने समाज के प्रति उत्तरदायी बनाए।
हरिजन, 22 नवंबर 1934
