दुनिया के सभी धर्मों में सदाचार एक आवश्यक अंग माना गया है: महात्मा गाँधी

पश्चिम में लोगों की आम राय यह है कि मनुष्य का एकमात्र कर्त्तव्य अधिकांश मानव-जाति की सुखवृद्धि करना है, और सुख का अर्थ केवल शारीरिक सुख और आर्थिक उन्नति माना जाता है। यदि इस सुख की प्राप्ति में नैतिकता के कानून भंग

मैं देशप्रेमी हूँ, क्योंकि मैं मानव-प्रेमी हूं: महात्मा गाँधी

मेरे लिए देशप्रेम और मानव-प्रेम में कोई भेद नहीं है; दोनों एक ही हैं। मैं देशप्रेमी हूँ, क्योंकि मैं मानव-प्रेमी हूं। मेरा देशप्रेम वर्जनशील नहीं है। मैं भारत के हित की सेवा के लिए इंग्लैण्ड या जर्मनी का नुकसान नहीं करूँगा। जीवन

मैंने बहुत कम पुस्तकें पढ़ी हैं परंतु उन्हे अच्छे से हजम करने की पूरी कोशिश की है: महात्मा गाँधी

विद्यार्थी-जीवन में पाठ्यपुस्तकों के अलावा मेरा वाचन नहीं के बराबर समझना चाहिए। और कर्मभूमि में प्रवेश करने के बाद तो समय ही बहुत कम रहता है। इस कारण आज तक भी मेरा पुस्तक-ज्ञान बहुत थोड़ा है। मैं मानता हूँ कि इस अनायास

…इस तरह तो मुझे फांसी से भी बचाया जाना पसंद नहीं: महात्मा गाँधी

मैंने असंख्य बार कहा है कि सत्याग्रह में हिंसा, लूटमार, आगजनी आदि के लिए कोई स्थान नहीं है; लेकिन इसके बावजूद हमने मकान जलाये हैं, बलपूर्वक हथियार छीने हैं, लोगों को डरा-धमकाकर उन से पैसा लिया है, रेलगाड़ियाँ रोकी हैं, तार काटे

‘अभय’ के लिए हरिश्चंद्र की तरह बर्बाद होने की तैयारी होनी चाहिए: महात्मा गाँधी

अभय का मतलब है तमाम बाहरी भयों से मुक्ति। मौत का डर, धन-दौलत लुट जाने का डर, कुटुम्ब-कबीले के बारे में डर, रोग का डर, हथियार चलने का डर, आबरू का डर, किसी को बुरा लगने का – चोट पहुँचाने का डर,

कॉंग्रेसजनों को प्रत्येक हिन्दू और अहिन्दू का प्रतिनिधि बन जाना चाहिये: महात्मा गाँधी

साम्प्रदायिक एकता की आवश्यकता के बारे में सब सहमत हैं। परन्तु सबको यह मालूम नहीं है कि, एकता का अर्थ राजनीतिक एकता नहीं है, जो ऊपर से थोपी जा सकती है। उसका अर्थ है न टूटने वाली हार्दिक एकता। ऐसी एकता पैदा

सांप्रदायिक हत्याओं के खिलाफ बदले की भावना से समाज में शांति संभव नहीं है : महात्मा गाँधी

खून का बदला खून से या मुआवजे से कभी नहीं लिया जा सकता। खून का बदला लेने का एकमात्र उपाय यह है कि बदला लेने की कोई इच्छा न रखकर हम खुशी से अपने को बलिदान कर दें। बदले या मुआवजे से

ब्राह्मण और भंगी, सबमें भगवान विद्यमान है : गाँधी

  यदि विश्व में जो कुछ है वह सब ईश्वर से व्याप्त है, अर्थात,  ब्राह्मण और भंगी, पंडित और मेहतर, सबमें भगवान विद्यमान है, तो न कोई ऊंचा है और न कोई नीचा, सभी सर्वथा समान है; समान इसलिए क्योंकि सभी उसी

“अगर हिंदुस्तान का नसीब खराब है तो ईश्वर मुझे उठा ले!”

“लियाकत अली साहब और हमारे प्रधानमंत्री में भी यही समझौता हुआ है न, कि जो पाकिस्तान जाना चाहें वे पाकिस्तान चले जाएँ; लेकिन लियाकत अली साहब, सरदार और जवाहरलाल भी किसी को मजबूर नहीं कर सकते। कोई कानून नहीं है। इसीलिए जो

मुझे समझायें मैं कैसे हिन्दू धर्म को नुकसान पहुँचा रहा हूँ ?

“सभ्यता का नियम तो यह है कि जिन लोगों को कुरान शरीफ की आयत पर आपत्ति है वे अपना विरोध प्रकट करके चले जाएं और बाद में मुझको समझायें कि मैं इससे किस प्रकार हिन्दू धर्म को नुकसान पहुँचाता हूँ।  मैं समझदार

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